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कृषि विभाग के महत्वपूर्ण कार्यक्रम

“फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना“(JICA EAP)

प्रदेश में कृषि विविधिकरण को बढ़ावा देने हेतु ”321 करोड़ रूपये की हिमाचल प्रदेष फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना“ जापान इन्टरनेषनल को आपरेषन एजेंसी

(JICA EAP)के सहयोग से जून, 2011 से लागू की गई है। इसमें 266 करोड़ रुपये ऋण है जिसका 90 प्रतिषत भाग भारत सरकार

द्वारा वहन किया जा रहा है और 55 करोड़ रुपये राज्य भाग है। इसके अन्तर्गत सिंचाई सुविधाएं, फार्म तक सड़क मार्ग, किसानों के समूह गठित कर

सब्जी उत्पादन व विपणन हेतु तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाकर, परियोजना क्षेत्र में कार्यरत कृषि अधिकारियों को प्रषिक्षण आदि द्वारा सब्जी

उत्पादन व फसल विविधिकरण को बढ़ावा देना शामिल है। परियोजना का संचालन हिमाचल प्रदेष एग्रीकल्चर डेवेल्पमेंन्ट सोसाईटी कर रही है

जिसका गर्वनिंग बोर्ड है जिसके अध्यक्ष कृशि मंत्री हैं और एग्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष सचिव ;कृशिद्ध है। इस परियोजना को प्रदेश के पाँच

जिलों क्रमशः बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा व ऊना में योजनाबद्ध तरीके से 7 वर्ष यानि मार्च, 2018 तक कार्यान्वित करना प्रस्तावित था

परन्तु फसल विविधिकरण को कार्यान्वित करने हेतु इस परियोजना को वर्श 2020 तक कार्यान्वित किया जायेगा। इस परियोजना का मुख्यालय

हमीरपुर में है। परियोजना के अन्तर्गत 210 लघु सिंचाई योजनाऐं, 147 सम्पर्क मार्ग, 37 कलैक्शन सैंटर बनाये जा रहे हैं तथा सब्जी उत्पादन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। जाईका चरण-प्प् परियोजना की सैधान्तिक स्वीकृति जाईका टोकियो द्वारा अप्रैल 2020 में कर दी गई है

जिसका क्रियान्वयन जाईका मिषन द्वारा थ्मेंपइपसपजल त्मचवतज के बाद आगामी 5-6 माह में किया जायेगा और इस सन्दर्भ में श्रप्ब्।

ज्वालव द्वारा थ्मेंपइपसपजल जैनकपमे का कार्य जुलाई, 2020 में षुरू कर दिया गया है।

”मुख्यमन्त्री नूतन पाॅलीहाउस परियोजना’’

प्रदेश सरकार ने वर्श 2019-20 से 150 करोड़ रूपये की ”मुख्यमन्त्री नूतन पाॅलीहाउस परियोजना’’ प्रस्तावित की है, जिसके अन्तर्गत 5000

पाॅलीहाऊस बनाए जायेंगे। इस परियोजना को दो चरणों में कार्यान्वित किया जायेगा। प्रथम चरण की अवधि तीन वर्श (2020-21 से 2022-23) तक होगी और इस पर 78.57 करोड़ रु. खर्च किये गये जायेंगे। प्रथम चरण में 2522 पाॅली हाऊस बनाए जायेंगे। इस योजना में किसानों को पाॅली

हाऊस व इसके अन्दर सूक्ष्म सिंचाई लगाने पर 85 प्रतिषत उपदान उपलब्ध है। इस परियोजना को नाबार्ड ने वित्तीय सहायता हेतु मार्च, 2020 में स्वीकृति दे दी है। इस वर्श इस परियोजना पर 20 करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे और 500 पाॅलीहाॅउस बनाये जायेंगे।

”मुख्यमन्त्री ग्रीनहाउस नवीकरण योजना’’

प्रदेश सरकार ने वर्श 2017-18 से पाॅलीहाउस के अंतर्गत पाॅलीषीट को बदलने हेतु मुख्यमंत्री ग्रीनहाउस नवीकरण योजना आरम्भ की है। इस योजना के अंतर्गत 5 वर्ष पष्चात या प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त होने पर पाॅलीषीट को बदलने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा 70 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। वर्ष 2020μ21 के लिए इस य¨जना पर 1 कर¨ड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

‘‘सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से कुषल सिंचाई योजना ’’

इस योजना का मुख्य उद्देष्य पानी के उचित उपयोग से राज्य में कृषि समुदाय को कुषल एवं आष्वासित सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। प्रदेश में सूक्ष्म सिंचाई जैसे स्प्रिंकलर / ड्रिप को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तथा इस परियोजना के माध्यम से 8,500 हैक्टेयर क्षेत्र को टपक/फुव्वारा सिंचाई प्रणाली के तहत् लाया जायेगा। इस योजना के अन्तर्गत सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना पर 80 प्रतिषत उपदान है। इस वर्श योजना के लिए 30 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

‘‘मुख्यमन्त्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना’’

कृषि मशीनरी के प्रयोग के दौरान किसानों तथा खेतीहर मज़दूरों के घायल होने अथवा उनकी मृत्यु होने की सूरत में सहायता प्रदान करने के उद्देष्य से सरकार द्वारा ‘मुख्यमन्त्री किसान एवं खेतीहर मजद़ूर जीवन सुरक्षा योजना’ नामक एक योजना आरम्भ की है। इसमें मृत्यु होने पर सहायता के रूप में

3.0 लाख रू0, स्थाई रूप से अपंग होने पर 1.0 लाख रू0 तथा आंशिक स्थाई अपंग होने पर प्रभावित को सहायता के रूप में 10,000 से 40,000 रू0 तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इस वर्श के लिए इस योजना पर 40 लाख रू. का प्रावधान रखा गया हैे।

‘‘मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना’’

प्रदेश में बंदर¨ एंव जंगली जानवरों से फसलों को काफी नुक्सान पहुंच रहा है। इसी के बचाव के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना आरम्भ की है। इस योजना के अन्तर्गत कृशकों को सौर ऊर्जा चलित बाड़ लगाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर 80 प्रतिषत व समूह आधारित बाड़ बन्दी के लिए 85 प्रतिषत अनुदान का प्रावधान है। बाड़ को सौर उर्जा से संचारित किया जा रहा है। बाड़ में विद्युत प्रवाह से आवारा पशुओं, जंगली जानवरों एवं बंदरों को दूर रखने में मदद मिलेगी। सरकार ने किसानों की माँग तथा सुझावों को देखते हुुऐ, (1) कांटेदार तार अथवा चेनलिंक बाड़ लगाने के लिये 50 प्रतिशत उपदान (2) क्ंपोजिट बाड़ लगाने के लिए 70 प्रतिशत उपदान का प्रावधान किया गया है। इस वर्श योजना के लिए 40 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया हैैं।

‘‘उत्तम चारा उत्पादन योजना’’

राज्य में चारे का उत्पादन बढ़ाने के लिये सरकार ने ‘‘उत्तम चारा उत्पादन योजना’’ आरम्भ की है। किसानों को उपदान दरों पर चारा घास के गुणवत्तायुक्त बीज, कलम तथा स्तरोन्नत चारा किस्मों की पौध उपलब्ध करवाई जा रही है। विभाग चरी, बाजरा, जई, बरसीम, मक्खन घास व चारा मक्की के बीज पर सभी किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है। किसानों के लिये चारा काटने की मशीन (टोका मशीन) एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। सरकार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और बीपीएल किसानों को चारा काटने की मशीन पर 50 प्रतिषत उपदान की सुविधा दे रही है। प्रदेश सरकार किसानों को अजोला घास की खेती करने को भी प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए सरकार किसानों को पिट बनाने के लिए 50 प्रतिशत उपदान दे रही है। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष 5.60 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे।

‘‘उठाऊ सिंचाई योजना का निर्माण एवं बोरवैल योजना’’

प्रदेश के उन क्षेत्रों में जहाँ सिंचाई के लिए सतही जल स्त्रोत कृशि-जोतों से गहरे स्थानों में उपलब्ध है का उपयोग करने के लिए व्यक्तिगत स्तर की लघु/मध्यम उठाऊ सिंचाई योजनाऐं बनाई जाती है तथा जहाँ सिंचाई के लिए सतही जल स्त्रोत उपलब्ध नहीं है एवं भूमिगत पानी सम्भावित हो, ऐसे स्थानों पर विभाग किसानों को कृषि सिंचाई की पूर्ति के लिए व्यक्तिगत बोरवैल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। जो भी व्यक्ति अथवा किसान समूह, उठाऊ सिंचाई योजना का निर्माण एवं बोरवैल स्थापित करता है तो उन्हें 50 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत जल संग्रहण टैंक, सिप्रक्ंलर तथा पानी के पाईप भी उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। इस वर्श योजना के लिए 10 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

‘‘कृशि विपणन’’

मार्किटिंग की सुविधा हर किसान के घर-द्वार पहुंचे इसके लिए जगह-जगह छोटे सब्जी संग्रहण केन्द्र व मार्किट यार्ड बनाए जा रहे हैं। प्रदेष में कुल 10 मण्डिया तथा 50 उप मण्डिया कार्यरत है। वर्तमान सरकार मण्डियों व कोल्ड स्टोर के माध्यम से विपणन को बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष मण्डियों पर 10 करोड़ रु. खर्च किये जाऐंगे। प्रदेष में अभी तक ई पोर्टल के अंतर्गत 19 मण्डिया कार्यरत है और 10 मण्डिया इस पोर्टल के माध्यम से जोड़ी जा रही है।

‘‘जल से कृषि को बल योजना“

इस योजना के अन्तर्गत प्रदेष में उपयुक्त स्थलों पर चैकडैम एवं तालाबों का निर्माण किया जायेगा उनमें एकत्रित जल को किसान व्यक्तिगत लघु उठाऊ सिंचाई योजनाऐं या बहाव सिंचाई योजनाऐं (जैसा अपेक्षित हो) बनाकर सिंचाई के लिए पानी उपयोग कर सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत 5 वर्षों के लिए 250 करोड़ रूपये तथा इस वर्ष 25.00 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे। योजना के अन्तर्गत सामुदायिक लघु जल संचयन योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए षत प्रतिषत व्यय सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।

‘‘प्रवाह सिंचाई योजना“

इस योजना के अन्तर्गत प्रदेष में कूहलों के स्रोतों का नवीनीकरण तथा सामुदायिक क्षेत्रों में कूहलों को सुदृढ करने का कार्य किया जा रहा है। योजना के अन्तर्गत सभी सामुदायिक कार्यों के लिए षत प्रतिषत व्यय सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। योजना के अन्तर्गत व्यकितगत स्तर पर बोरवैल और उथले कुओं के निर्माण पर 50 प्रतिषत की सहायता का प्रावधान है। योजना के अन्तर्गत 5 वर्षों के लिए 150 करोड़ रूपये तथा इस वर्ष 15.00 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे।

‘‘राज्य कृशि यंत्रीकरण कार्यक्रम“

प्रदेष में कृशि अभियान्त्रिकी को बढ़ावा देने तथा पहाड़ी खेती के मषीनीकरण हेतु राज्य सरकार द्वारा वर्श 2018-19 से एक नई योजना ‘‘राज्य कृशि यंत्रीकरण कार्यक्रम’’ लागू की गई है। विभाग द्वारा इस योजना के अन्तर्गत प्रदेष के किसानों को बड़े स्तर पर ट्रैक्टर, पावर टिलर व पावर वीडर इत्यादि उपदान पर उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। योजना के अन्तर्गत वित्त वर्श 2020-21 में प्रदेष के किसानों को ट्रैक्टर 8-20 हार्स पावर 50 प्रतिषत उपदान अधिकतम सीमा 2.25 लाख रुपये, 20-40 हार्स पावर 50 प्रतिषत उपदान अधिकतम सीमा 3.00 लाख रुपये उपदान के रुप में उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इसी तरह 8 हार्स पावर या इससे अधिक क्षमता के पावर टिलर पर 50 प्रतिषत उपदान अधिकतम सीमा 85 हजार रुपये तथा पावर वीडर पर 50 प्रतिषत उपदान अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये उपदान के रुप में उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेष के बेरोजगार युवाओं व सहकारी सभाओं को कृशि उपकरण सुविधा केन्द्र स्थापित करने हेतू 40 प्रतिषत उपदान का प्रावधान रखा गया है ताकि प्रदेष के गरीब किसान व वागवान इन केन्द्रों से किराये पर उपकरण हासिल कर सकें। इस योजना के क्रिया न्वयन हेतू प्रदेष सरकार द्वारा वित्त वर्श 2020-21 हेतू 20 करोड़ रुपये का वजट प्रावधान रखा गया है।

कृशि कोशः-

कृशक उत्पादक संगठन किसानों, बागवानों, दुग्ध उत्पादकों, मछुआरों आदि प्राथमिक उत्पादकों के निकाय हैं। किसान व बागवान संसाधन जुटाने में प्रायः असफल रहते हैं। उन्हें फसल बुवाई से कटाई तक तथा कटाई के बाद गे्रडिंग और पैकेजिंग मषीनों, परिवहन, भण्डारण, गोदाम और पैक हाऊस जैसे बुनियादी ढाँचे तथा अन्य आदानों की आवष्यकता होती है जिस के लिए दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत रहती है। इसको ध्यान में रखते हुए प्रदेष सरकार ने इस वर्श 20 करोड़ रुपये का कृशि कोश बनाने का प्रावधान किया है जिससे कृशक उत्पादक संगठन किसानों को Seed Money, बैंक ऋण पर उपदान और के्रडिट गारंटी कवर प्रदान किया जाएगा। इस के लिए सरकार द्वारा विस्तृत दिषा -निर्देष तैयार किए जा रहे हैं। 2022 तक 75 हजार से 90 हजार किसानों को कृशि कोश का लाभ मिलने की संभावना है।

”कृशि सम्पनता योजना“

Institure of Himalayan Bio Technology(IHBT) पालमपुर द्वारा हींग की एक नई प्रजाती की पहचान की गई है जो कि चम्बा, लाहौल-स्पिति और किनौर जिले की उंचाई वाले क्षेत्रों में उगाई जा सकती है। इसी तरह कुछ क्षेत्रों में केसर की खेती के लिए अनुकूल जलवायु एवं वातावरण पाया गया है। इन दोनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेष सरकार ने इस वर्श से कृशि सम्पनता योजना प्रस्तावित की है। इस योजना को क्रियान्वित करने हेतु विभाग द्वारा विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली गई है। इसके अन्तर्गत 6 जून, 2020 को प्भ्ठज् के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित कर लिया गया है। योजना के अन्तर्गत हींग व केसर की खेती की षुरूआत करना व प्रगतिषील किसानों के खेतों में हींग व केसर की फसलों के प्रदर्षन लगाना षामिल है। इसके साथ-साथ अधिकारियों व किसानों को इस खेती विधि की व्यापक जानकारी देने के लिए प्रषिक्षणों का प्रावधान भी है।

कृशि उत्पादन संरक्षण योजना (एन्टी हेल नेटस) 2020-21

इस योजना के अन्र्तगत फसलों को ओलावृश्टि से बचाने हेतू राज्य सरकार द्वारा किसानो को एन्टी हेल नेटस की खरीद पर 80 प्रतिषत अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा। प्रदेष के सभी सब्जी उत्पादक किसानों को उनकी फसलों को प्राकृति आपदा से बचाने के लिए एन्टी हैल नैटस उपलब्ध करवाये जाने है ताकि फसलों को ओलावृश्टि, आवारा पशुओं व बन्दरों से बचाया जा सके, प्रदेष के सभी किसानों को एन्टी हैल नैटस खरीदने के लिए सरकार द्वारा 10 करोड रूपये का वित्तिय प्रावधान किया गया है तथा पात्र किसानों को 28 रूपये प्रति वर्ग मीटर की दर से अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा, जिसमें अधिकतम 5 हजार वर्ग मीटर के लिए पात्र किसान इस योजना के अन्तर्गत लाभ ले सकतें हैं।

“चाय व काॅफी की खेती”

चाय व काॅफी महत्वपूर्ण पेय है जो कि पूरे संसार में प्रचलित है। प्रदेष में चाय की खेती जिला कांगड़ा के धौलाधार बोटेनिकल गाडर्न वर्श 1849 से की जा रही है। प्रदेष में चाय की खेती के अन्तर्गत 2315 हैक्टेयर भूमि है। विभाग के तकनीकी अधिकारी द्वारा कृशकों के लिए निम्न योजनाएं कायान्वित की जा रही है।

1. कृशको को सुधरी किस्मों के पौधों का वितरण

2. प्रर्दषन प्लाॅटों की योजना

3. प्रर्दषन -भ्रमण

‘‘खाद पर उपदान’’

राज्य सरकार मिश्रित खादों जैसे डी.ए.पी.18:46:0, इफको-एन.पी.के.12:32:16 और 10:26:26 व आर.सी.एफ.-एन.पी.के.15:15:15 की कीमत पर 1000 रूपये प्रति मिट्र्कि टन उपदान दे रही है। इस योजना के अन्तर्गत 1.79 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है।

‘‘अच्छी गुणवत्तायुक्त बीजों का गुणन एवं उनका वितरण’’

विभाग के अपने 36 बीज गुणन प्रक्षेत्र है जहाॅं पर कि रबी और खरीफ के फसलों का आधार बीज तैयार किया जाता है। इन बीज फार्मों में अनाज, दालों और सब्जियों का लगभग 3500 से 4000 क्विंटल बीज प्रतिवर्ष तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा विभिन्न फसलों के 90,000 क्विंटल प्रमाणित बीज राज्य के किसानों को वितरित किये जाते हैं।

‘‘पौध संरक्षण’’

विभाग इस कार्यक्रम के अन्तर्गत फसलों में लगने वाली बिमारियों में तथा कीटों के प्रकोप की स्थिति पर लगातार निगरानी रखता है। शिमला में प्रादेषिक कीटनाषक परीक्षण प्रयोगषाला स्थापित की गई है जो कि अपनी क्षमता के अनुसार प्रति वर्ष 300-400 नमूनों की जांच करती है। इसके अतिरिक्त जैविक विधि से कीट नियन्त्रण करने के उदेष्य से एक जैव नियंत्रक प्रयोगषाला तथा जैविक कीटनाषक प्रयोगषाला पालमपुर में स्थापित की गई है जहां संरक्षण कीट स्थिति वृद्धि, पालन और जैव एजेंटों और प्रसार कर्मियों और किसानों के लिए परीक्षण दिया जा रहा है तथा जैव नियन्त्रक एजेंट तैयार किए जाते हैं।

‘‘गुणवत्ता नियंत्रण’’

इस योजना के तहत बीज, खाद और कीटनाषकों पर विभिन्न अधिनियमों के अल्तर्गत गुणवता नियन्त्रण का क्रियान्वयन सुनिष्चित किया जाता है। इसके लिए प्रदेष में गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारियों को अधिसूचित किया गया है। विभाग के द्वारा तीन उर्वरक प्रयोगषालाएं हमीरपुर, सुन्दरनगर व शिमला में और तीन बीज परीक्षण प्रयोगषालाएं सोलन, पालमपुर और मण्डी में तथा कीटनाषक प्रयोगषाला शिमला में कार्यरत है। इनमें 2000 उर्वरक के नमूने, 300 कीटनाषक और 700 बीज के नमूने का प्रतिवर्श का विष्लेशण किया जा रहा है।